यदि तुम्हें मेरे सत्स्वरूप का ज्ञान हो जाए और अन्य किसी प्रकार का ज्ञान न भी हो तब भी तुम सुखी ही होगे  – श्रीकृष्ण

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वार्षिक राशिफल चन्द्र जन्मराशि अनुसार

नामाक्षर-चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ

नामाक्षर-ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो

नामाक्षर-का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह

नामाक्षर-ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो

नामाक्षर-मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे

नामाक्षर-ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो

नामाक्षर-रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते

नामाक्षर-तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू

नामाक्षर-ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे

नामाक्षर-भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी

नामाक्षर-गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा

नामाक्षर-दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची

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सफलता प्रणाली जो कभी असफल नहीं होती है

भाग्य उन कर्मो का फल है जो जीव नाना प्रकार की योनियों को भोगते हुए करता है. नाना प्रकार की योनियों को भोगते हुए अच्छे कर्म करते रहने के कारण जीव को मनुषय शरीर मिलता है और साथ में प्राप्त होती है एक शक्ति. उस शक्ति का नाम है मंथन. मंथन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके चलते जीव अपने से जुड़े सभी प्रश्नो के उत्तर ढूंढता है. मनुष्य शरीर मिलते ही जीव देश, परिस्तिथि और काल के आधीन अलग-अलग प्रकार के कर्म करता है और और फिर कुछ फलो की तत्काल प्राप्ति से और प्रारब्ध कर्म फलो के आधार पर जीवन जीता है. भूतकाल में किये कर्मो के कारण जो नकारात्मक परिस्तिथियाँ जीव को निरंतर मिलती रहती है. उसके चलते जीव परेशान रहता है और निरंतर इन समस्यों को समाप्त करने के लिए उपाय ढूंढता रहता है.
भाग्य को सही दिशा देने के लिए सकारात्मक आत्मिक और वैचारिक परिवर्तन को लाना ही भाग्य मंथन है. इस परिवर्तन को लाने का आधार बस शुद्ध ज्ञान को प्राप्त करना है. शुद्ध ज्ञान प्राप्ति ही मंथन की शक्ति को सही मार्ग देने में सक्षम है.
भग्यान मंथन में हम कुछ नित्य कुछ नया सिखने का प्रयास करते है. जिसमे वैदिक ज्ञान, पुराणों में बताई गयी कथाओ का ज्ञान और ऐसा ही बहुत कुछ. इन सभी चीजों का जब तक मंथन नहीं किया जायेगा तब तक…और पढ़े

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